Enjoy Our Life
Nature Shayari
Nature Shayari
तीरगी चांद के ज़ीने से सहर तक पहुँची
Dec 17th
तीरगी चांद के ज़ीने से सहर तक पहुँची
ज़ुल्फ़ कन्धे से जो सरकी तो कमर तक पहुँची
मैंने पूछा था कि ये हाथ में पत्थर क्यों है
बात जब आगे बढी़ तो मेरे सर तक पहुँची
मैं तो सोया था मगर बारहा तुझ से मिलने
जिस्म से आँख निकल कर तेरे घर तक पहुँची
तुम तो सूरज के पुजारी हो तुम्हे क्या मालुम
रात किस हाल में कट-कट के सहर तक पहुँची
एक शब ऐसी भी गुजरी है खयालों में तेरे
आहटें जज़्ब किये रात सहर तक पहुँची
Barish ka Mausam or thandi hawa……….
Dec 17th
Barish aaye aur zamin bhigi na ho…
Dec 17th
देखो तो फूल कितने हसीन लगते है
Dec 17th
देखो तो फूल कितने हसीन लगते है
तोडेंग़े हम तो ये कितने गमगीन लगते है
जब भी हवा चलती है तो ये कैसे लहराते है
अपनी खुशबू से हम सब को महकाते है
देखते ही दिल मे उतर जाते है
जाने कब ये प्यार बन जाते है
सब को ये दोस्ती सिखाते है
बिन कहे सब कुछ कह जाते है
बारिश मे धुल कर हम को तडपाते है
कभी हम को इतना रूलाते है
ज़िन्दगी मे किसी की याद छोड जाते है
फूलो को देख कर ही तो हम मुस्कुराते है
