Nature Shayari

Nature Shayari

तीरगी चांद के ज़ीने से सहर तक पहुँची

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तीरगी चांद के ज़ीने से सहर तक पहुँची
ज़ुल्फ़ कन्धे से जो सरकी तो कमर तक पहुँची

मैंने पूछा था कि ये हाथ में पत्थर क्यों है
बात जब आगे बढी़ तो मेरे सर तक पहुँची

मैं तो सोया था मगर बारहा तुझ से मिलने
जिस्म से आँख निकल कर तेरे घर तक पहुँची

तुम तो सूरज के पुजारी हो तुम्हे क्या मालुम
रात किस हाल में कट-कट के सहर तक पहुँची

एक शब ऐसी भी गुजरी है खयालों में तेरे
आहटें जज़्ब किये रात सहर तक पहुँची

Barish ka Mausam or thandi hawa……….

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Barish ka Mausam or thandi hawa
Ho gayi dekho aaj umangen jawan
Inn umango se hi zindgi khil khilane lagi
Aaj phir iss barish ko dekh ke
Zindgi jhoom ke nachne gane lagi
Lagta hai aaj aise jaise
Zindgi phir se muskurane lagi

Barish aaye aur zamin bhigi na ho…

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Barish aaye aur zamin bhigi na ho
Dhoop nikle aur sarson peeli na ho
Aye dost tune ye kaise soch liya
Ke teri yaad aaye, aur tere mobile me mera sms na ho

देखो तो फूल कितने हसीन लगते है

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देखो तो फूल कितने हसीन लगते है
तोडेंग़े हम तो ये कितने गमगीन लगते है
जब भी हवा चलती है तो ये कैसे लहराते है
अपनी खुशबू से हम सब को महकाते है
देखते ही दिल मे उतर जाते है
जाने कब ये प्यार बन जाते है
सब को ये दोस्ती सिखाते है
बिन कहे सब कुछ कह जाते है
बारिश मे धुल कर हम को तडपाते है
कभी हम को इतना रूलाते है
ज़िन्दगी मे किसी की याद छोड जाते है
फूलो को देख कर ही तो हम मुस्कुराते है

DOOR DESH SE AAYEE TITLI KITNE RANG RANGILE

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DOOR DESH SE AAYEE TITLI KITNE RANG RANGILE
KABHI WO BAITHE PHOOLO PAR KABHI GAGAN KO CHHOOLE
HAIN PAWAN AUR KOMAL KITNE, MAN MANDIR SA DEKHO
DIL KARTA HAI HUM BHI UNSA TITLI BAN KE JEE LE
NAHI KISI SE BAIR HAI UNKA BAS